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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 90
यत्र यत्र स्थितोयोगी सुखमत्यन्तमश्नुते । तस्मात्‌ सर्वप्रयत्नेन साधयेन्मुद्रिकां पराम्‌ ॥
वह योगी जहाँ-जहाँ स्थित होगा, वहाँ-वहाँ अत्यंत सुख को ग्रहण करता है। अत: सब प्रयत्नो से इसे साधना चाहिये।
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