नभोमुद्रा - जहाँ-जहाँ भी योगी किसी कार्य में स्थित हो, तब तब सदैव ऊपर की ओर जिह्वा से स्थित होकर वायु को धारण करे। योगियों के रोगों का नाश करने वाली यह नभोमुद्रा होती है।
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