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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 9
यत्र यत्र स्थितो योगी सर्वकार्येषु सर्वदा । ऊर्ध्वजिह्वः स्थिरो भूत्वा धारयेत्‌ पवनं सदा । नभोमुद्रा भवेदेषा योगिनां रोगनाशिनी ॥
नभोमुद्रा - जहाँ-जहाँ भी योगी किसी कार्य में स्थित हो, तब तब सदैव ऊपर की ओर जिह्वा से स्थित होकर वायु को धारण करे। योगियों के रोगों का नाश करने वाली यह नभोमुद्रा होती है।
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