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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 88
नासाभ्यां रेचयेत्‌ पश्चात्‌ कुर्यादेवं पुनः पुनः । मातङ्गिनी परा मुद्रा जरामृत्युविनाशिनी ॥
पुन: उसका नासाछिद्रों से रेचन करे। यदि पुन:-पुन: ऐसा करे तो मातंगिनी मुद्रा जरामृत्यु का नाश करती है।
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