क्षयकासं गुदावर्त्त प्लीहाजीर्णज्वरं तथा ।
नाशयेत्सर्वरोगांश्च महामुद्रा च साधनात् ॥
इस महामुद्रा के अत्यधिक सेवन से क्षमज खाँसी, गुदावर्त (गुदा के फोड़े) तापतिल्ली, जीर्णज्वर, तथा अन्य सब रोग नष्ट होते हैं।
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