आम्भसीं परमां मुद्रां यो जानाति स योगवित् ।
जले च गम्भीरे घोरे मरणं तस्य नो भवेत् ॥
इस श्रेष्ठ आम्भसी मुद्रा को जो जानता है, वह योगज्ञानी है। गम्भीर जल में उसका कभी मरण संभव नहीं होता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।