मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 71
शड्डेन्दुप्रतिमज्च कुन्दधवलं तत्त्वं किलालं शुभम्‌ तत्पीयूषवकारबीजसहितं युक्तं सदा विष्णुना । प्राणांस्तत्र विनीय पञ्चघटिकांश्चित्तान्वितां धारयेत्‌ एषादुःसहतापपापहरिणी स्यादाम्भसी धारणा ॥
इसका वर्ण शंख और चन्दमा जैसा सुन्दर, कुन्दपुष्प जैसा धवल है। शोभायमान वकार बीज से युक्त अमृत की संज्ञा वाला है, जो सदा ही विष्णु शक्ति से युक्त है या विष्णु इसके देवता हैं। (इस स्वरूप का ध्यान जल तत्व में करते हुए) प्राण को खींचकर पाँच घटी (२ घण्टे) तक कुंभक में स्थिर हो, यही दुःसह तापों को नष्ट करने वाली आंभसी धारणा होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें