इसका वर्ण शंख और चन्दमा जैसा सुन्दर, कुन्दपुष्प जैसा धवल है। शोभायमान वकार बीज से युक्त अमृत की संज्ञा वाला है, जो सदा ही विष्णु शक्ति से युक्त है या विष्णु इसके देवता हैं। (इस स्वरूप का ध्यान जल तत्व में करते हुए) प्राण को खींचकर पाँच घटी (२ घण्टे) तक कुंभक में स्थिर हो, यही दुःसह तापों को नष्ट करने वाली आंभसी धारणा होती है।
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