पार्थिवी धारणामुट्रां य: करोति च नित्यशः ।
मृत्युञ्जयः स्वयं सोऽपि स सिद्धो विचरेद् भुवि ॥
(इसका फल कहते हैं) प्रतिदिन जो जन पार्थिवीधारण को करता है, वह मृत्युञ्जय हो जाता है, वह सिद्ध हो भूमि पर विचरता है।
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