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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 69
यत्तत्त्वंहरितालदेशरचितं भौमं लकारान्वितं वेदास्तं कमलासनेन सहितं कृत्वा हृदि स्थायिनम्‌ । प्राणांस्तत्र विलीय पञ्चघटिकांश्चित्तान्वितां धारयेदेषास्तम्भकरी सदा क्षितिजयं कुर्यादधो धारणा ॥
भूमि का जो तत्व हरिताल (हल्दी) जैसा पीला है, लकार से युक्त है, आकार चोकोर है, ऐसे उन (वेदास्रं) कमलासन ब्रह्मा के सहित हृदय में ध्यान करे। तब प्राणवायु को खींचकर पाँच घटी (दो घण्टा) तक उसे धारण करे। यह स्तंभकरी अधोधारणा भी कही जाती है। इससे धरती पर विजय हो जाती है।
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