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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 67
कथिता शाम्भवी मुद्रा शृणुष्व पञ्च धारणाम्‌ । धारणानि समासाद्य किं न सिद्ध्यति भूतले ॥
पंचधारणा मुद्रा - इस प्रकार शांभवी मुद्रा कही गयी, अब पंचधारण मुद्रा को सुनो। पंचधारणाओं को प्राप्त करके मनुष्य इस भूतल पर क्या नही प्राप्त कर सकता?
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