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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 64
वेदशास्त्रपुरणानि सामान्यगणिका इव । इयं तु शाम्भवी मुद्रा गुप्ता कुलवधूरिव ॥
वेद, शास्र और पुराण इस मुद्रा के समक्ष सामान्य गणिका जैसे हैं (गौण हैं) जबकि यह शांभवी मुद्रा कुलवधु के समान गोपनीय है।
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