मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 59
नित्यं योऽ भ्यसते योगी सिद्धिस्तस्य करे स्थिता । तस्य विग्रहसिद्धिः स्याद्रोगाणां सङ्क्षयो भवेत्‌ ॥
जो योगी नित्य इसका अभ्यास करता है, उसके हाथ में सिद्धि आ जाती है। उसे विग्रह सिद्धि हो जाती है और उसके रोगों का क्षय हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें