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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 58
मुद्रेयं परमा गोप्या जरामरणनाशिनी । तस्माद्‌भ्यसनंकार्य योगिभिः सिद्धिकाङक्षिभिः ॥
यह मुद्रा परं गोपनीया है और जरामरण का नाश करती है। अतः सिद्धि चाहने वाले योगियों को इसका अभ्यास करना चाहिये।
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