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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 53
भस्मना गात्रं संलिप्य सिद्धासनं समाचरेत्‌ । नासाभ्यां प्राणमाकृष्य अपाने योजयेद्‌ बलात्‌ ॥
भस्म से शरीर को लिप्त करके पुन: सिद्धासन लगाना चाहिये। पुन: नासाछिद्रों (दोनों) से वायु खींचकर अपानवायु के साथ मिलाना चाहिये।
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