नाभिं संवेष्ट्य वस्रेण न च नग्नो बहिस्थितः ।
गोपनीयगृहे स्थित्वा शक्तिचालनमभ्यसेत् ॥
नाभिस्थान को वस्त्र से लपेट कर किन्तु नग्न होकर बाहर (सार्वजनिक रूप से) नहीं, अपितु गोपनीय गृह में स्थित होकर शक्तिचालन का अभ्यास करना चाहिये।
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