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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 48
मूलाधारे आत्मशक्तिः कुण्डली परदेवता । शयिता भुजगाकारा सार््धत्रिवलयान्विता ॥
शक्तिचालनी मुद्रा - आत्मशक्ति मूलाधार में (शरीर में) सबसे बड़ा देवता - कुंडली शयन स्थिति में सर्पाकार साढ़े तीन वलयों (गोलाकारों) से युक्त है।
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