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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 44
धरामवष्टभ्य करयोस्तलाभ्यामूर्ध्व क्षिपेत्पादयुगं शिरः खे । शक्तिप्रबो धाय चिरजीवनाय वञ्रोणिमुद्रां मुनयो वदन्ति ॥
वज्रोणिमुद्रा - कि करतलों को धरा पर रख करके दोनों पैरों और सिर को ऊपर उठाये। शक्ति के जागरण के लिये तथा चिरजीवन (दीर्घजीवन) पाने के लिये मुनिजन वज्रोणिमुद्रा को कहते हैं।
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