मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 43
यानि पापानि घोराणि उपपापानि यानि च । तानि सर्वाणि नश्यन्ति योनिमुद्रानिबन्धनात्‌ । तस्मादभ्यासनं कुर्याद्यदि मुक्तिं समिच्छति ॥
जो भी घोर पाप और उपपाप हैं, वे सब योनिमुद्रा के (विधिवत) पालन से नष्ट हो जाते हैं। अत: यदि मुक्ति की इच्छा करनी है तो इस द्रा का अभ्यास करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें