योनिमुद्रा परा गोप्या देवानामपि दुर्ल्लभा ।
सकृत्तु लाभसंसिद्धिः समाधिस्थः स एव हि ॥
योनिमुद्रा परं गोपनीय है। यह देवताओं को भी दुर्लभ हैं। सब प्रकार के लाभों की सिद्धि इससे संभव होती है और वही जन वस्तुत: समाधिस्थ होता है।
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