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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 40
शिवशक्तिसमायोगादेकान्ते भुवि भावयेत्‌ । आनन्दमानसो भूत्वा अहं ब्रह्मेति सम्भवेत्‌ ॥
शिव (कल्याणमय) शक्ति के संयोग से भूमि पर एकान्त की भावनां करनी चाहिये। स्वयं परमानंद स्वरूप होकर 'अहं तत्व ही ब्रह्म है' यह भाव तब संभव होता है।
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