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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 39
शक्तिमयः स्वयं भूत्वा परं शिवेन सङ्गमम्‌ । नानासुखं विहारञ्च चिन्तयेत्‌ परमं सुखम्‌ ॥
इससे स्वयं शक्तिवान्‌ होकर परं कल्याण का संयोग पाकर अनेक प्रकार के सुख, विहार और परं आनंद का चिन्तन करता हैं।
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