नवनीतं घृतं क्षीरं दधितक्रमधूनि च ।
द्राक्षारसं च पीयूषं जायते रसनोदकम् ॥
तदुपरान्त नवनीत (मक्खन), घृत, दुग्ध, दही, मधु, द्राक्षा, और अमृत जैसे रसों की उत्पत्ति हो जाती है।
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