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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 31
नाना रस समुद्भूतमानन्दं च दिने दिने । आदौ लवणक्षारं च ततस्तिक्तं कषायकम्‌ ॥
अनेक प्रकार के रसों का दिन-दिन अद्भुत आनंद प्राप्त होता है। प्रांरभ में लवण, क्षार का और तिक्त (तीखे) और कषाय का रसानुभव होता है।
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