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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 30
लावण्यं च भवेद्‌ गात्रे समाधिर्जायते ध्रुवम्‌ । कपालवक्त्र संयोगे रसना रसमाप्नुयात्‌ ॥
शरीर में सुन्दरता आ जाती है, और निश्चय ही समाधि सिद्ध होती है। कपाल और मुख के संयोग होने पर रसना के रसों की प्राप्ति हो जाती हैं।
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