नाग्निना दह्ते गात्रं न शोषयति मारुतः ।
न देहं क्लेदयन्त्यापो दंशयेन्न भुजङ्गमः ॥
शरीर को न अग्नि जला पाती है, न पवन सुखा पाती है, न जल गला पाता है और न सर्प डस सकता है।
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