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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 26
एवं नित्यं सम भ्यासाल्लम्बिका दीर्घतां ब्रजेत्‌ । यावद्गच्छेद्‌ भ्रुवोर्मध्ये तदागच्छति खेचरी ॥
इस प्रकार नित्य अभ्यास से जिह्वा लम्बी हो जाती है। जब वह भ्रुवों के मध्य में पहुँच जाये तो खेचरी की ओर ले जाती है।
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