न मृत्युतो भयं तस्य न जरा तस्य विद्यते ।
गोपनीयः प्रयत्नेन वेधोयं योगिपुङ्गवैः ॥
वह न मृत्यु से भय करता है और न उसे जरा आती है। अत: योगी विशिष्टों द्वारा यह महावेधमुद्रा गोपनीय मानी गयी है।
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