मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 22
महाबन्धं समासाद्य उङट्टानकुम्भकं चरेत्‌ । महावेधः समाख्यातो योगिनां सिद्धिदायकः ॥
प्रथम महाबंध मुद्रा को करे, पुन: उड्डीयान बंध मुद्रा द्वारा कुंभक प्राणायाम को करना चाहिये। इस प्रकार यही महाबंध मुद्रा कही जाती है, जो योगियों को सिद्धिदायक है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें