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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 21
रूपयौवनलावण्यं नारीणां पुरुषं विना । मूलबन्धमहाबन्धौ महावेधं विना तथा ॥
महावेध - जिस प्रकार पुरुष के बिना नारी का रूप, यौवन और सुन्दरता (निरर्थक है), उसी प्रकार महावेध मुद्रा के बिना मूलबन्ध और महाबंध होते हैं।
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