रूपयौवनलावण्यं नारीणां पुरुषं विना ।
मूलबन्धमहाबन्धौ महावेधं विना तथा ॥
महावेध - जिस प्रकार पुरुष के बिना नारी का रूप, यौवन और सुन्दरता (निरर्थक है), उसी प्रकार महावेध मुद्रा के बिना मूलबन्ध और महाबंध होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।