इसके बाद शनै:-शनै: गुह्मस्थान का चाल न करें-चलायें और आकुञ्चन या सिकोड़ने की क्रिया करें। तथा प्राणवायु जालन्धर में धारण करें। यही महाबन्ध कहलाता है।
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