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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 18
वामपादस्य गुल्फेन पायुमूलं निरोधयेत्‌ । दक्षपादेन तदगुल्फं संपीड्य यत्नतः सुधी: ॥
बायें पैर की एड़ी से पायुमूल का निरोध करना चाहिये तथा योगीजन को दायें पैर से बायीं एड़ी को प्रयत्नपूर्वक दबाना चाहिये।
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