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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 16
संसारसमुद्र तर्तुमभिलषति यः पुमान्‌ । विरलेसुगुप्तो भूत्वा मुद्रामेनां समभ्यसेत्‌ ॥
संसार सागर से पार होने को जो जन इच्छा करता है, वह एकांत स्थान में इस मुद्रा में स्थितमन होकर अभ्यास करें।
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