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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 15
मेढ दक्षिणगुल्फे तु दृढबन्धं समाचरेत्‌ । जराविनाशिनी मुद्रा मूलबन्धो निगद्यते ॥
पुन: लिङ्ग को दायीं एड़ी से दृढ़ता से दबाये, यह जरा को विनाशक मुद्रा मूलबंध कही जाती है।
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