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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 14
पार्षिणना वामपादस्य योनिमाकुञ्चयेत्ततः । नाभिग्रन्थि मेरुदण्डे सम्पीड्य यत्नतः सुधी: ॥
मूलबंध - वाम पैर की एड़ी से गुह्यस्थान (योनिस्थान) का आकुंचन करे, पुन: नाभिग्रन्थी को मेरुदण्ड से यत्नपूर्वक दबाये।
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