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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 11
समग्राद्बन्धनादेतदुट्टीयानं विशिष्यते । उट्टीयाने समभ्यस्ते मुक्तिः स्वाभाविकी भवेत्‌ ॥
समस्त मुद्राबंधो में उड्डीयान बंध विशिष्ट माना जाता है। इस उड्डीयान बंध के साधन से स्वयं ही मुक्ति होती है।
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