(ब्रजासन क्या है-) दोनों जंघाओं को वञ्रवत् (समानसुदृढ़ भाव में) करके गुदा के पार्श्व (दोनों ओर) दोनों पैरों को रखना, यह वज्रासन योगियों को सिद्धि देने वाला है।
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