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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 39
उत्तानौ चरणौ कृत्वा संस्थाप्य जानुनोपरि । आसनोपरि संस्थाप्य उत्तानं करयुग्मकम्‌ ॥
पैरों को उत्तान (चित्त) करके और जंघाओं पर स्थापित करके पुन: आसन पर स्थित करके हाथों को उत्तान भाव से रखे।
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