देहाग्निर्वद्धते नित्यं सर्वरोगविनाशनम् ।
जागर्ति भुजगी देवी भुजगासनसा धनात् ॥
भुजंगासन - भुजंगासन से नित्य ही जठराग्नि बढ़ती है, सब रोगों का विनाश होता है, भुजंगासन की साधना से भुजगी देवी जागती है अर्थात् इस आसन को करने से कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होती है।
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