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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 36
अधास्य शेते पदयुग्मव्यस्तं पृष्ठे निधायापि धृतं कराभ्याम्‌ । आकुञ्चयेत्सम्यगुदरास्यगाढमाष्ट्रञ्च पीठं योगिनो वदन्ति ॥
उष्ट्रासन - नीचे मुख करके शयन करे, पुनः दोनों पैरों को पीछे से लाकर दोनों हाथों से धारण करे, तथा उदर और मुख को दृढता से आकुंचन (सिकोड़) ले, इसे योगीजन उष्ट्रासन कहते हैं।
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