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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 35
अधास्य शेते हृदयं निधाय भूमौ च पादौ च प्रसार्यमाणौ । शिरे च धृत्वा करदण्डयुग्मे देहागिनिकारं मकरासनं तत्‌ ॥
मकरासन - नीचे मुख करके लेटे, पुनः भूमि पर हृदय रखकर पैरों को फैलाकर पुन: हाथों से सिर को धारण करे, जठराग्नि बढ़ाने वाला यह मकरासन होता है।
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