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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 34
अधास्य शेते करयुग्मं वक्षेभूमिमवष्टभ्य करयोस्तला भ्याम्‌ । पादौ च शून्ये च वितस्ति चोर्ध्व१ वदन्ति पीठं शलभं मुनीन्द्राः ॥
शलभासन - पहले नीचे मुख करके लेट जाये, दोनों हाथों को छाती में रख, करतलों से भूमि को पकड़ पुनः पैरों को शून्य में ऊपर की ओर फैलाये, इसे मुनिजन शलभासन कहते हैं।
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