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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 30
वामोरुमूलदेशे च याम्यं पादं निधाय तु । तिष्ठेत वृक्षवद्भूमौ वृक्षासनमिदं विदुः ॥
वृक्षासन - वाम जंघा की जड़ में दायें पैर को रखकर पुन: वृक्ष के समान भूमि पर खड़ा हो, यही वृक्षासन है।
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