मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 3
सिद्धं पद्मं तथा भ्रं मुक्तं वञ्रञ्च स्वस्तिकम्‌ । सिंहञ्च गोमुखं वीरं धनुरासनमेव च ॥ मृतं गुप्तं तथा मत्स्यं मत्स्येन्द्रासनमेव च । गोरक्षं पश्चिमोत्तानं उत्कटं सङ्कटं तथा ॥ मयूरं कुक्कुटं कूर्म तथाचोत्तानकूर्मकम्‌ । उत्तानमण्डूकं वृक्षं मण्डूकं गरुडं वृषम्‌ ॥ शलभं मकरं चोष्ट्रै भुजङ्गञ्चयोगासनम्‌ । द्वत्रिंशदासनानि तु मर्त्यलोके हि सिद्धिदम्‌ ॥
सिद्धासन, पदमासन, भद्रासन, मुक्तासन, वज्रासन, स्वस्तिकासन, सिहीँसन, गोमुखासन, वीरासन, धनुरासान, मृतासन, गुप्तासन, मत्स्यासन, मत्स्येन्द्रासन, गोरक्षासन, पश्चिमोत्तानासन, उत्कटासन, संकटासन, मयूररासन, कुक्कुटासन, कूर्मासन, उत्तानकूर्मासन, उत्तानमण्ड्कासन, वृक्षासन, मण्ड्कासन, गरुडासन, वृषभासन, शलभासन, मकरासन, उष्ट्रासन, भुजङ्गासन, योगासन, (ये सब) कुल बत्तीस आसन मनुष्यलोक में सिद्धियाँ देने वाले हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें