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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 29
मण्डूकासनमध्यस्थं कूर्पराभ्यां धृतं शिरः । एतत्‌ भेकवदुत्तानमेतदुत्तानमण्डुकम्‌ ॥
उत्तान कूर्मासन - मण्डूकासन में बैठकर हाथों के पिछले भागों से (कर्पूरो) से मस्तक को धारण कर उत्तान हो जाये। यह उत्तान मण्डूकासन होता है।
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