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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 28
कुक्कुटासनबन्धस्थं कराभ्यां धृतकन्धरम्‌ । पीठं कूर्मवदुत्तानमेतदुत्तानकूर्मकम्‌ ।।
उत्तान कूर्मासन - प्रथम तो कुक्कुटासन बाँधे, पुनः हाथों से कन्धा पकड़कर पुन: कछुवे के समान चित्त हो जाये, यह उत्तानकूर्मासन होता है।
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