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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 25
धरामवष्टभ्य करयोस्तलाभ्यां तत्कूर्परे स्थापितनाभिपार्श्वम्‌ । उच्चासनो दण्डवदुत्थितः खे मायूरमेतत्प्रवदन्ति पीठम्‌ ॥
मयूरासन - दोनों हाथों के तलो से बल से भूमि पर स्थिर होकर उनके कर्पूर (हाथ के मणिबन्ध के समीप के भागों) को नाभि के पार्श्व भागों पर रखकर ऊपर दण्डवत्‌ आसन में होना मयूरासन होता है।
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