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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 21
जानूर्वोरन्तरे पादौ उत्तानौव्यक्तसंस्थितौ । गुल्फो चाच्छाद्य हस्ता भ्यामुत्ताना भ्यां प्रयत्नत: ।।
गोरक्षासन - दोनों पैरों को उरुओं और जंघाओं के बीच में चित्त रखकर अव्यक्त (गोपनीय) भाव से रखे, फिर दोनों हाथों से एडियों को पकड़ ले।
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