मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 18
प्रसार्य पादौ भुवि दण्डरूपौ संन्यस्त भालं चितियुग्ममध्ये । यत्नेन पादौ च धृतौ कराभ्यां योगीन्द्रपीठं पश्चिमोत्तानमाहुः।।
पश्चिमोत्तानासन - दोनों पैरों को भूमि पर दण्ड रूप में फैला कर और सिर को जंघाओं के मध्य रखकर और दोनों हाथों से पैरों को पकड़े, इसे पश्चिमोत्तासन कहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें