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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 17
मुक्तपद्मासनं कृत्वा उत्तानशयनञ्चरेत्‌ । कूर्पराभ्यां शिरो वेष्ट्य मत्स्यासनन्तु रोगहा ॥
मत्स्यासन - मुक्तपद्मासन लगाकर घुटनों में सिर का वेष्टन करके सीधे होकर (चित्तहोकर) शयन करें, इस प्रकार यह मत्स्यासन सब रोगों का नाशक होता है।
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