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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 16
जानूर्वोरन्तरे पादौ कृत्वा पादौ च गोपयेत्‌ । पादोपरि च संस्थाप्य गुदं गुप्तासनं विदु: ॥
गुप्तासन - दोनों जानुओं के मध्य में पैरो को करके गोपन भाव से रखना चाहिये। तथा पैरों पर गुदा को रखे, इसे गुप्तासन कहा जाता है।
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