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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 14
प्रसार्य पादौ भुवि दण्डरूपौ करौ च पृष्ठे धृतपादयुग्मम्‌ । कृत्वा धनुस्तुल्यपरिवर्त्तिताङ्गं निधाय योगी धनुरासनं तत्‌ ॥
(धनुरासन की विधि बताते हैं-) दोनों पैरों को भूमि पर दण्ड रूप में फैलाकर, हाथों को पीछे करके दोनों पैरों को पकड़े, इसके बाद शरीर को धनुष के समान करके अङ्गों को परिवर्तित करे, इधर-उधर पलटे।
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